
आदिवासी बड़े शूरवीर होते हैं। वे पीठ पर गोली खाना कतई पसंद नहीं करते। वे सीधे सीने पर गोली खाकर मातृभूमि के लिए मर मिट जाने पर भरोसा करते हैं। इसका एक बड़ा उदाहरण है आदिवासी जवान राजू पोयम की शहादत।
सात गोलियों का जख्म सहने के बाद भी राजू पोयम मैदान छोड़कर भागे नहीं, बल्कि नक्सलियों का डटकर मुकाबला करते रहे। आज न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरा देश रणबांकुरे राजू पोयम को सैल्यूट कर रहा है।।
20 मार्च को बीजापुर जिले और दंतेवाड़ा जिले की सरहद पर हुई मुठभेड़ में बस्तर संभाग के वीर आदिवासी सपूत राजू पोयम शहीद हो गए थे। डीआरजी जवान राजू पोयम बीजापुर जिले के गंगालूर थाना क्षेत्र के जंगलों में नक्सलियों के साथ हुई मुठभेड़ में फोर्स का हिस्सा थे।
सूत्र बताते हैं कि राजू पोयम के शरीर पर सात गोलियां लगी थीं, फिर भी वे अपना दर्द भूलकर नक्सलियों का डटकर मुकाबला करते रहे। तीन चार नक्सलियों को ढेर करने के बाद ही राजू पोयम ने अंतिम सांस ली।
आज उनके पार्थिव शरीर को बीजापुर मुख्यालय में गार्ड ऑफ ऑनर देने के बाद गृहग्राम भैरमगढ़ ले जाया गया जहां उनका अंतिम संस्कार किया गया। राजू पोयम को अंतिम विदाई देने ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी।