

जिला सहकारी संघ मर्या. कांकेर के अध्यक्ष सियो पोटाई ने कांकेर जिला के सभी सहकारी संस्थाओं को अंकेक्षित वित्तीय पत्रक एवं जिला सहकारी संघ को दिये जाने वाले अभिदाय अंशदान की राशि शीघ्र दिये जाने हेतु पत्र लिखा है। ताकि सहकारी समितियों के सदस्यों को प्रशिक्षण एवं सहकरिता के प्रचार-प्रसार का कार्य किया जा सके। श्रीमती पोटाई ने पंजीयक सहकारी संस्थाएं छ.ग. एवं राज्य सहकारी संघ रायपुर के पत्रों का हवाला देते हुए कहा है कि सदस्य समितियों से जिला सहकारी संघ को प्रत्येक वर्ष अंकेक्षित वित्तीय पत्रक प्राप्त नहीं होने से सदस्यता अभिदाय की गणना एवं अंशदान राशि की गणना में असुविधा हो रही है। उन्होने आगे कहा कि जिला सहकारी संघ द्वारा सहकारिता के शिक्षण प्रशिक्षण एवं प्रचार प्रसार का कार्य करते हुए सहकारी आन्दोलन विस्तार में योगदान दिया जाता है। यह संस्था जिले से संबंधित सभी सहकारी कार्यों को राज्य संघ के तथा उसके द्वारा अखिल भारतीय संघ के मान्य प्रतिनिधि के हैसियत से कार्य करता है। छत्तीसगढ़ सहकारी सोसायटी अधिनियम, 1960 की धारा 47 के तहत राज्य शासन के द्वारा जारी अधिसूचना के तहत राज्य अंतर्गत पंजीकृत एवं कार्यरत समस्त सहकारी संस्थाओं को राज्य सहकारी संघ एवं जिले के जिला सहकारी संघ में सम्बद्ध किया गया है तथा प्रति वर्ष सदस्य समितियों द्वारा दिये जाने वाले अभिदाय को अधिसूचित किया गया है । छत्तीसगढ़ सहकारी सोसायटी नियम, 1962 के 30 में अधिनियम की धारा 43(2) खण्ड-अ के अधीन दिये जाने वाले अंशदान की दर तय की गई है जो कि सदस्यों द्वारा राज्य सहकारी संघ तथा जिला सहकारी संघों को समयावधि में भुगतान किया जाना बाध्यकारी है। इसके बाद भी सहकारी संस्थाएं सहकारी नियमों की अवहेलना कर रहे है।
उन्होने कहा कि जिला सहकारी संघ कांकेर, बस्तर जिला सहकारी संघ से 16 जून 2017 से पृथक होकर नये रूप में आ चुका है। जिसका पंजीयन क्रमांक/जे.आर./जे.डी.पी./दिनांक 16.06.2017 है। संस्था के अस्तित्व में आने से लेकर आज दिनांक तक अभी तक कांकेर जिले के समस्त सहकारी समितियों से जिला सहकारी संघ को प्राप्त होने वाला अभिदाय/अंशदान की राशि अप्राप्त है। जबकि यह राशि नियमानुसार जिला सहकारी संघ मर्या. कांकेर के बचत खाते में जमा हो जाना चाहिए था। उन्होने कहा कि विधिवत रूप से दिनांक 02.01.2021 को जिला सहकारी संघ के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं अन्य सोसायटी के प्रतिनिधियों के निर्वाचन भी हो चुका है। और समिति की नियमित बैठकें भी हो रहीं है। संस्था के अध्यक्ष श्रीमती सियो पोटाई ने बताया कि कांकेर जिला में 70 आदिम जाति सेवा सहकारी समिति, 5 विपणन एवं प्रक्रिया सहकारी समिति, 3 जिला वनोपज सहकारी समिति, 100 प्राथमिक वनोपज सहकारी समिति सहित मतस्य, दुग्ध एवं अन्य समितियों सहित लगभग 389 सहकारी समितियां है।
उन्होने इस बाबत संयुक्त पंजीयक जगदलपुर, उप पंजीयक कांकेर, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी को पत्र लिखकर छत्तीसगढ़ सहकारी सोसायटी अधिनियम, 1960, नियम 1962, संस्था की उपविधि के प्रावधानों तथा पंजीयक द्वारा समय-समय पर जारी निर्देशों के अनुक्रम में कांकेर जिले में पंजीकृत एवं कार्यरत सहकारी संस्थाओं को निर्देशित करने हेतु निवेदन किया है कि वे यथास्थिति राज्य सहकारी संघ तथा जिला सहकारी संघों को समयावधि में अभिदाय एवं अंशदान का भुगतान करें तथा उक्त राशि की गणना संघ द्वारा नियमानुसार करने हेेतु अंकेक्षित वित्तीय पत्रक की प्रति अनिवार्य रूप से प्रतिवर्ष उल्लेख करावें ताकि अधिनियम को मंशा अनुरूप संघ द्वारा सहकारी शिक्षा, प्रशिक्षण, प्रचार-प्रसार का कार्य सुचारू रूप से किया जा सके।