
कांकेर अगर सुबह उठते ही चाय या कॉफ़ी पीने की आदत है, तो उसे छोड़कर हल्दी और काली मिर्च का पानी, जीरा, सौंफ और अजवाइन का पानी या बस गुनगुना पानी पिएं। आप हर्बल चाय भी ले सकते हैं। नींद से जागते ही मोबाइल देखने की आदत आंखों के लिए ठीक नहीं है। इसीलिए मोबाइल को दूसरे कमरे में रखें और उसकी जगह सूरज की रोशनी का आनंद लें या आंगन/बालकनी में थोड़ी देर टहलें। प्राकृतिक रोशनी न सिर्फ़ आंखों को आराम देगी, बल्कि इससे आपके मन को शांति भी मिलेगी। सुबह मोबाइल स्क्रॉल करने के बजाय आप पॉडकास्ट सुनते हुए हल्की-फुल्की कसरत कर सकते हैं या कुछ ज़रूरी काम पूरे कर सकते हैं।
खाने-पीने की आदतों में छोटे-छोटे बदलाव करके हम अपने स्वास्थ्य में बड़ा सुधार कर सकते हैं। अगर आपको सोडा या मीठे जूस की तलब हो, तो उनकी जगह ताज़े फल, हर्ब्स या डिटॉक्स पेय (जैसे- संतरा, पुदीना, खीरा आदि) पिएं। इससे न सिर्फ़ शरीर हाइड्रेटेड रहेगा, बल्कि अतिरिक्त शर्करा का सेवन भी कम होगा। यह मोटापे और मधुमेह जैसी बीमारियों से बचाव में मदद करेगा। दोपहर के मीठे स्नैक्स के बजाय डार्क चॉकलेट और नट्स का सेवन करें।
त्वचा की देखभाल के लिए हम अक्सर रसायन युक्त उत्पादों का उपयोग करते हैं जो हानिकारक हो सकते हैं। इन्हें प्राकृतिक और ऑर्गेनिक उत्पादों से बदलें। रसायन युक्त क्रीम के बजाय उबटन का इस्तेमाल करें और बालों के लिए हर्बल उत्पाद या रीठे का प्रयोग करें। प्लास्टिक की बोतल के बजाय कांच या तांबे की बोतल का इस्तेमाल करें, जो न केवल पर्यावरण के लिए बेहतर है, बल्कि आपकी सेहत के लिए भी फ़ायदेमंद है।
सुबह जगाने वाला फोन का अलार्म अक्सर तेज़ शोर करता है, जो दिन की शुरुआत को तनावपूर्ण बना देता है। इसे बदलकर आप प्रकृति की ध्वनियों, जैसे- पक्षियों या समुद्र की लहरों की आवाज़ रख सकते हैं।
एक हफ्ते में ही आपको सुबह का समय पहले से ज़्यादा शांत, ताज़ा और हल्का लगेगा। समय के साथ, आपकी नींद की गुणवत्ता, ऊर्जा स्तर और मानसिक स्थिति भी बेहतर हो सकती है।