53 साल पुरानी मांग को लेकर पूरे छत्तीसगढ़ में जनजाति सुरक्षा मंच की ओर से चलाया जा रहा आंदोलन . . .

53 साल पुरानी मांग को लेकर पूरे छत्तीसगढ़ में जनजाति सुरक्षा मंच की ओर से चलाया जा रहा आंदोलन . . .

कांकेर/बस्तर मित्र।

53 साल पुराने डी-लिस्टिंग की मांग को लेकर जनजाति सुरक्षा मंच छत्तीसगढ़ द्वारा प्रदेश व्यापी आंदोलन चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में रविवार को कांकेर जिला मुख्यालय में डी-लिस्टिंग रैली निकाली गई इसमें अजा व अजजा समाज के लोग जिन्होंने दूसरा धर्म अपना लिया है, उन्हें आरक्षण से वंचित करने की मांग की गई मेला भाठा में आम सभा के बाद शहर में रैली निकाली गई।

जिसका जगह-जगह विभिन्न समाज व संगठनों ने स्वागत किया मेला भाटा से निकली रैली शहर के मुख्य मार्गो से होते पुराना कमेटी हॉल पहुंच समाप्त हुई। मेला भाठ में आम सभा को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि व प्रवक्ता मंगलदास ठाकुर ने कहा छत्तीसगढ़ व भारत में सबसे ज्यादा राज करने वाले राजा गोंडवाना राजा के हैं वे बहादुर थे । पिछले 72 पीढ़ी में किसी ने कभी धर्मांतरण नहीं किया। धर्मांतरण को लेकर जब पहली बार संसद में बिल लाया गया । तो धर्मांतरण करने वालों में हड़कंप मच गया इस कानून में साफ लिखा था जो भी व्यक्ति दूसरे धर्म को अपना लेता है उसे अनुसूचित जनजाति वर्ग का सदस्य नहीं माना जाएगा ।

इस बिल को रोकने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर दबाव बनाया गया मेघालय व पूर्वोत्तर के दो मंत्री इसे रोकने आ गए। कहा बिल नहीं रोका जाएगा तो अलग देश बनाएंगे तत्कालीन प्रधानमंत्री ने आदिवासी हित के लिए बने विधेयक को रोकने लोकसभा ही भंग कर दी इसके साथिया मुद्दा डब्बे में बंद हो गया। अब इस विधेयक को ओपन करने आंदोलन शुरू किया गया है। धर्मांतरण को कानून या सरकार नहीं रुकेगी गांव के लोग रोक सकते हैं जो धर्मांतरण करने वाले हैं उन्हें गांव में घुसने मत दो धर्मांतरण वहीं रुक जाएगा। इस दौरान जनजाति सुरक्षा मंच पदाधिकारी व सदस्य महेश कश्यप, ईश्वर कावड़े, सरोजनी मंडावी, भोजराज नाग, भूपेंद्र नाग, पूर्व सांसद विक्रम उसेंडी पूर्व विधायक देवलाल दुग्गा आदि थे।

धर्मांतरण के कारण सब कुछ हो जाएगा बर्बाद :-

पूर्व विधायक व जनजाति सुरक्षा मंच से जुड़े भोजराज नाग ने कहा जो हमारे समाज का नहीं वह किसी का नहीं हो सकता। धर्मांतरण से हमारा सब कुछ बर्बाद हो जाएगा हम एक-एक गांव जाकर जन जागरण करेंगे राष्ट्रीय स्तर पर महारैली करेंगे और कानून बनवा कर रहेंगे।

जाने क्या है डी-लिस्टिंग :-

डी-लिस्टिंग से तात्पर्य है आरक्षित वर्ग के लोग जिनका धर्म परिवर्तन लालच या अन्य प्रलोभन देकर दूसरे धर्म में कराया गया है लेकिन वह अब भी आरक्षित वर्ग को मिलने वाले आरक्षण का लाभ ले रहे हैं इन्हें डी-लिस्टिंग करने की मांग हो रही है उन्होंने कहा कि अनुसूचित जनजाति के योग्य लोगों को आरक्षण का लाभ मिल सके।

53 साल पुरानी है या मांग :-

साल 1967-68 मैं दिवंगत सांसद कार्तिक उरांव ने धर्म परिवर्तन कर आरक्षण का दोहरा लाभ उठाने का मामला संसद में उठाया था। इसके बाद डीलिस्टिंग की मांग को 2004 में उस वक्त बल मिला जब सुप्रीम कोर्ट ने केरल राज्य बनाम केशव नंदन भारती के ऐतिहासिक मामले में उसके पक्ष में फैसला सुनाया।

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