कोड़ेजुंगा में निजी भूमि को राजस्व विभाग के अफसरों ने सरकारी बना दिया . . .

कोड़ेजुंगा में निजी भूमि को राजस्व विभाग के अफसरों ने सरकारी बना दिया . . .

कांकेर/बस्तर मित्र।

उक्त भूमि को पाने के लिए कोर्ट कचहरी का चक्कर लगाने मजबूर होना पड़ जाएगा। कुछ ऐसा ही कोड़ेजुंगा में हुआ है। कांकेर शहर निवासी एक महिला की निजी भूमि को पटवारी ने 2.03 हेक्टेयर मैं से 1.43 हेक्टेयर सरकारी मद में कर दिया है। पीड़िता चंपा यादव पति स्वर्गीय कन्हैया लाल यादव ने बताया कि वह नगर क्षेत्र मांझा पारा की निवासी है। उसकी पैतृक भूमि ग्राम पंचायत को भेजूंगा में खसरा क्रमांक 708 रकबा 2.03 हेक्टेयर राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज थी। वर्षों से उक्त भूमि पर खेती किसानी करते आ रही हैं। किसी काम के लिए निजी भूमि का दस्तावेज राजस्व विभाग से लिया तो पता चला कि उसके नाम पर मात्र 0.60 हेक्टेयर भूमि है। शेष 1.43 हेक्टेयर भूमि राजस्व विभाग के अफसरों ने सरकारी मद में दर्ज कर दिया है। निजी भूमि राजस्व विभाग के दस्तावेज में सरकारी दर्ज होने की जानकारी मिलते हक्का-बक्का रह गई। आलाधिकारियों के पास गुहार की तो गोलमोल जवाब देना शुरू कर दिए।

पीड़िता 2 साल से कभी तहसील न्यायालय तो कभी अनुविभागीय अधिकारी तो कभी कलेक्टर के पास चक्कर लगा रही है हाथ में दस्तावेज लेकर अधिकारियों को दिखा रही है कि साहब देखें सन 1988-89 में दस्तावेज में उसकी पैतृक भूमि परिवार के नाम पर 2.0 3 हेक्टेयर दर्ज है। 3 दशक में उक्त भूमि में से 1.43 हेक्टेयर कैसे सरकारी मद में दर्ज कर दिया गया। पीड़िता के बार-बार गुहार करने के बाद भी राजस्व विभाग के अधिकारी ना तो सही जानकारी दे रहे हैं और ना ही निजी भूमि को सरकारी मद में कैसे दर्ज किया गया बता रहे हैं। बस्तर मित्र को पीड़िता ने बताया कि वह न्याय के लिए 2 साल से अफसरों के पास चक्कर लगा रही है। उसकी निजी भूमि सरकारी मद में कैसे दर्ज किया गया उसी से दस्तावेज मांगा जा रहा है। सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों ने निजी भूमि को सरकारी मद में दर्ज कर दिए हैं। उक्त त्रुटि में सुधार करने के बजाय गुमराह कर रहे हैं। पीड़िता ने कहा अगर उसकी निजी भूमि को सरकारी मद में कैंसिल कर राजस्व रिकॉर्ड में 2.03 हेक्टेयर निजी दर्ज नहीं किया गया तो अनशन करेगी।

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