हमारी आकाशगंगा............

हमारी आकाशगंगा............

हमारी आकाशगंगा, जिसे मिल्की वे भी कहते हैं, एक विशाल सर्पिल आकाशगंगा है जिसमें अरबों तारे, ग्रह और अन्य खगोलीय पिंड शामिल हैं। आकाश गंगा या क्षीरमार्ग उस आकाशगंगा (गैलेक्सी) का नाम है, जिसमें हमारा सौर मण्डल स्थित है। आकाशगंगा आकृति में एक सर्पिल (स्पाइरल) गैलेक्सी है, जिसका एक बड़ा केंद्र है और उस से निकलती हुई कई वक्र भुजाएँ। हमारा सौर मण्डल इसकी शिकारी-हन्स भुजा (ओरायन-सिग्नस भुजा) पर स्थित है।

आकाश गंगा की बनावट

आकृति: यह एक सर्पिल आकाशगंगा है, जिसमें एक बड़ा केंद्र और उससे निकलती हुई कई सर्पिल भुजाएँ हैं। नाम: पृथ्वी से देखने पर, यह रात के आकाश में फैली एक चमकदार पट्टी के रूप में दिखाई देती है, इसलिए इसका नाम "दूधिया चक्र" (Milky Way) पड़ा। सौर मंडल: हमारा सौर मंडल इस आकाशगंगा की एक सर्पिल भुजा (ओरायन-सिग्नस भुजा) पर स्थित है, आकार: आकाशगंगा का अनुमानित व्यास 100,000-200,000 प्रकाश-वर्ष है, तारे और ग्रह: इसमें 100-400 अरब तारे और कम से कम इतने ही ग्रह होने का अनुमान है, गैलेक्सी समूह: मिल्की वे एक बड़ा गैलेक्सी समूह है, जिसमें हजारों से लाखों गैलेक्सियाँ और तारों का संघटित समूह होता है, अंतरिक्ष में: पृथ्वी से, मिल्की वे एक बैंड के रूप में दिखता है.

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रहस्यों से भरी हमारी गैलेक्सी

प्रदूषण मुक्त आसमान में देखने पर हमें एक रिबननुमा चीज दिखाई है, जिसे आकाशगंगा (Milky Way) कहा जाता है. आकाशगंगा के ढेरों रहस्य हैं, आइए ऐसे ही कुछ रहस्यों के बारे में जाना जाए. हमारी गैलेक्सी का नाम मिल्की वे (Miky Way) है, जिसमें अरबों की संख्या में तारें और ग्रह मौजूद हैं. अभी तक जितने भी ग्रह खोजे गए हैं, वे सभी आकाशगंगा में मौजूद हैं. आकाशगंगा रहस्यों से भरी हुई है. इसमें धूल, ग्रह, तारें, उल्कापिंड तैर रहे हैं. ऐसे में आइए अपनी आकाशंगा के कुछ अनसुने रहस्यों के बारे में जाना जाए. आकाशगंगा चारों ओर हजारों प्रकाशवर्ष की दूरी तक फैली हुई है, लेकिन इसकी मोटाई कुछ हजार प्रकाशवर्ष ही है. इस तरह ये एक डिस्क की तरह है, जिसमें धूल, ग्रह और तारें मौजूद हैं. हमारा सौर मंडल आकाशगंगा के केंद्र से 26 हजार प्रकाशवर्ष दूर है. हमारा सौरमंडल पांच लाख मील प्रति घंटा की रफ्तार से घूम रहा है. इस रफ्तार से भी हमें आकाशगंगा का एक चक्कर लगाने में 25 करोड़ साल का वक्त लग जाएगा. आखिरी बार जब हमारे सौरमंडल ने आकाशगंगा का चक्कर लगाया था तो 4.5 अरब साल पुरानी हमारी पृथ्वी पर डायनासोर अभी सामने आ रहे थे. आकाशगंगा के बिल्कुल बीचों बीच एक विशालकाय ब्लैक हॉल है, जो हमारे सूरज के वजन से 40 लाख गुना ज्यादा वजनी है. अभी तक किसी ने इस ब्लैक हॉल को सीधे तौर पर नहीं देखा है, लेकिन ये गैस और धूल के पीछे छिपा हुआ है. करीब चार अरब साल बाद आकाशगंगा अपने नजदीकी एंड्रोमेडा आकाशगंगा से टकरा जाएगी. वर्तमान समय में दोनों आकाशगंगाएं 2.5 मील प्रति घंटा की रफ्तार से एक दूसरे की ओर बढ़ रही हैं. जब ये दोनों टकराएंगी तो कुछ तारों को खासा नुकसान पहुंचेगा. हालांकि, हमारी पृथ्वी इस टक्कर में सुरक्षित बच जाएगी.

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लेखक (Reporter)

Gaurav Tandiya

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