
त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी की स्थापना से संबंधित बिल लोकसभा से पारित हो गया है. लोकसभा ने चर्चा और सहकारिता मंत्री अमित शाह के जवाब के बाद कुछ संशोधन के साथ इस बिल को ध्वनिमत से पारित कर दिया. इस बिल पर चर्चा के दौरान नाम को लेकर कई सदस्यों ने सवाल उठाए. मतदान के समय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद सौगत रॉय ने यूनिवर्सिटी का नाम त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी की जगह राष्ट्रीय सहकारिता विश्वविद्यालय रखने से संबंधित संशोधन प्रस्ताव भी मूव किया. उन्होंने कहा कि सहकारिता आंदोलन में कई चेहरों ने बड़ा काम किया है और सहकारिता मंत्री ने अपने जवाब में एक बार भी वर्गीज कुरियन का नाम नहीं लिया.
अमित शाह ने बताया कि क्यों इस य अपनी सीट पर खड़े हुए अमित शाह ने विस्तार से बताया कि क्यों इस यूनिवर्सिटी का नाम त्रिभुवन भाई पटेल के नाम पर रखा जा रहा है. अमित शाह ने कहा कि कई सदस्यों ने कुरियन साहब का नाम लिया है. इनको मालूम भी नहीं होगा कि कुरियन साहब का जन्म शताब्दी वर्ष चल रहा है और गुजरात सरकार इसे मना रही है. उन्होंने कहा कि अमूल की स्थापना त्रिभुवन भाई पटेल ने की थी. कुरियन साहब को अमूल में जॉब देने का काम त्रिभुवन पटेल ने किया.
अमित शाह ने ये भी कहा कि कुरियन साहब को दुग्ध उत्पादन पर अध्ययन के लिए डेनमार्क भेजने का काम त्रिभुवन पटेल ने किया था इसलिए यूनिवर्सिटी का नाम उनके नाम पर होगा. इस पर विपक्ष की ओर से किसी नेता ने कुछ टिप्पणी की जिसके जवाब में उन्होंने कहा कि कुरियन साहब का योगदान है और इसीलिए हमारी सरकार उनका शताब्दी वर्ष मना रही है. कांग्रेस की कोई सरकार नहीं मना रही है. अमित शाह ने ये भी कहा कि इस यूनिवर्सिटी का नाम हमने अपने किसी नेता के नाम पर नाम नहीं रखा है. त्रिभुवन पटेल भी कांग्रेस के ही नेता थे. उनके नाम का विरोध शायद इसलिए हो रहा है क्योंकि वे नेहरू-गांधी परिवार के नहीं थे.