कन्हारपुरी देव दशहरा हर्षोउल्लास के साथ सम्पन्न . . .

कन्हारपुरी देव दशहरा हर्षोउल्लास के साथ सम्पन्न . . .

बस्तर मित्र/कांकेर।

कन्हारपुरी देव दशहरा का समापन बहुत ही धूमधाम के साथ संपन्न हुआ। संविधान निर्मात्री के सदस्य ठाकुर राम प्रसाद पोटाई को समर्पित इस दशहरा पर्व में बस्तर अंचल के देवी देवता शामिल हुए खासतौर से पोटाई परिवार के नारायणपुर से आए हुए राज टेका माता का आगमन होना इस आयोजन की सफलता के लिए मील का पत्थर साबित हुआ। सारे पोटाई परिवार के सदस्यगण एवं सर्व समाज के लोग इन पेन-पुरखाओं की पूजा अर्चना कर भाव विभोर हो गए। श्रद्धा और आस्था के प्रतीक इन देवी-देवताओं नें तीन दिनों तक देव जात्रा में भाग लिए प्रत्येक दिन एवं रात इन देवी-देवताओं की पूजा अर्चना होती रही और दशहरा के दिन रैनी पूजा के साथ ही कन्हारपुरी देव दशहरा विधि-विधान से सम्पन्न हुआ। इस दौरान वॉलीबॉल, कबड्डी एवं महिलाओं के कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। जिसमें कबड्डी में प्रथम स्थान दुर्ग जिले की टीम रही वहीं द्वितीय स्थान कन्हारपुरी रही। जिन्हे क्रमशः 25,000 रू. एवं 20,000 रू. की नगद राशि प्रदान किया गया वहीं वॉलीबाल में प्रथम तिलदा नेवरा की टीम रही जबकि द्वितीय स्थान खरथा की टीम रही जिन्हे क्रमशः 15,000 रू. एवं 10,000 रू. नगद प्रदान किया गया। रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन हुआ।

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समापन अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में जिला पंचायत के अध्यक्ष हेमंत ध्रुव, कार्यक्रम अध्यक्ष के रूप में जिला सहकारी संघ मर्यादित कांकेर के अध्यक्ष सियो पोटाई एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में जिला पंचायत उपाध्यक्ष हेमनारायण गजबल्ला, नरोत्तम पडोटी, प्रोफेसर शरद ठाकुर, राजनांदगांव के पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर, रायगढ़ के वन मंडल अधिकारी स्टाइलो मंडावी, एसडीओ फॉरेस्ट सुषमा जी नेताम, डिप्टी कलेक्टर दिव्या पोटाई, न्यायिक मजिस्ट्रेट विवेक नेताम, सहित अतिथिगण उपस्थित रहे। इस अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि की आसंदी से जिला पंचायत अध्यक्ष हेमंत ध्रुव ने कहा कि देव दशहरा पर्व का आयोजन किया जाना हम सब के लिए गर्व की बात है। एक ओर जहां हम रीति रिवाज और परंपराओं को भूलते जा रहे हैं वहीं दूसरी ओर ऐसे आयोजन हमें पुनः गांव की ओर खींच कर ला रहा है। हम बड़े अधिकारी बनकर शहरों में क्यों ना चले जाएं लेकिन हमें हमारे इन परंपराओं को नहीं भूलना चाहिए आगे उन्होंने कहा कि ठा. रामप्रसाद पोटाई जी ने समाज के लिए और क्षेत्र के लिए बहुत कुछ किया है। अब उन्हें सम्मान देने की बारी हमारी है।

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विशिष्ट अतिथि जिला पंचायत के उपाध्यक्ष ने कहा कि ठा. रामप्रसाद पोटाई के बारे में हम बहुत पहले से सुनते आ रहे हैं। वर्ष 1993-94 में पोटाई जी की स्मृति में जब धनेलीकन्हार में खेलकूद किया जा रहा था उस वक्त मैं कक्षा नवमी में था। उस समय में अपनी माता जी के साथ शामिल होने का अवसर मिला था और आज इस आयोजन में पहुंचकर देवी देवताओं से आशीर्वाद लेकर मुझे सुखद अनुभूति हो रही है। विशिष्ट अतिथि जिला सहकारी संघ के अध्यक्ष सियो पोटाई ने कहा कि कन्हारपुरी का इतिहास जितना पुराना है उतना ही पुराना यहां का दशहरा पर्व है। जिसे हम लंबे समय से मनाते आ रहे है। यहां विभिन्न स्थानों से देवी-देवता, आंगा, डांग-डोली, पधारे हुए थे। उनकी पूजा कर हम धन्य हुए है।

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कार्यक्रम में विशेष रूप से पहुंचे राजनांदगांव पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर ने उपस्थित जन समुदाय को दशहरा की बधाई देते हुए कहा कि यहां पहुंच कर मुझे बहुत अच्छा लग रहा है लेकिन मेरे पदस्थ जिला में अत्यधिक कार्यक्रम होने के कारण मैं यहां समय नहीं दे पा रहा हूं। इस अवसर पर कार्यक्रम को डीएफओ स्टाइलो मंडावी, एसडीओ फॉरेस्ट सुषमा जे नेताम, न्यायिक मजिस्ट्रेट विवेक नेताम, प्रायार्य के.एस.तिवारी ने भी संबोधित कर आयोजन समिति को बधाई दी। कार्यक्रम का संचालन सुशील पोटाई, विकेश हिचामी, एवं राजीव कोमरा ने किया। आभार प्रदर्शन आयोजन समिति के संरक्षक हेमलाल शोरी ने किया।

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लोक संगीत की धुन में झूमे अतिथिगण

आयोजन स्थल पर लोकधुन और संगीत से सजे वाद्य यंत्रों को वादको ने जब बजाना शुरू किया तो आयोजन में उपस्थित अतिथिगण अपने आप को रोक नही पाये और मुख्य अतिथि हेमन्त धु्रव, पुलिस अधीक्षक राजनांदगांव प्रफुल्ल ठाकुर, प्रोफेसर शरद ठाकुर, स्टाइलो मंडावी, सुषमा जे नेताम आदि झूम पड़े। जिससे वहां का वातावरण संगीतमय हो गया।

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देव दशहरा ने कन्हारपुरी को दी नई पहचान

संविधान निर्मात्री समिति के सदस्य रहे ठा. रामप्रसाद पोटाई स्मृति देव दशहरा ने कन्हारपुरी को एक नई पहचान दी। इस पर्व में न केवल विभिन्न स्थानों से आये हुए देवी-देवताओं ने भाग लिया वरन् इस दशहरा पर्व में गांव की प्राचीन व्यवस्था (नार व्यवस्था) के माध्यम से दशहरा में शामिल होने वाले व्यक्तियों को बताने का प्रयास किया गया कि किसी गांव को बसाने में एक व्यक्ति या समाज का स्थान नहीं होता वरन् 12 बिरादरी के लोग मिलकर गांव के निर्माण में अहम भूमिका निभाते है। जिसमें आदिवासी समाज के साथ-साथ साहू समाज, कलार समाज, गंधर्व समाज, मरार समाज, सहित अन्य समाजों की भूमिका होती है। आयोजन समिति ने मंच को सामाजिक सौहार्दता का परिचय देते हुए सभी समाज के अतिथियों को महत्व दिया। इस दशहरे का महत्व इसलिए भी और बढ़ जाता है क्योंकि यह सारा आयोजन रामप्रसाद पोटाई को समर्पित रहा तथा इसमें लोग स्वस्फूर्त शामिल हुए। इस तरह इस देव दशहरा में विभिन्न देवी-देवताओं का संगम हुआ ऐसा अवसर बहुत कम मिलता है।

आयोजन में ये रहे उपस्थित

शिव तुमरेटी, सुशील पोटाई,, दिव्या पोटाई, डिप्टी कलेक्टर, धमतरी, विवेक नेताम, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी दुर्ग, दुर्गुन सिंह नेताम, दयाराम केमरो, कनेसिंह शोरी, मनोज कुमार तेता, सरपंच गीता पोटाई, विष्णु कावड़े, जगदेव केमरो, जवाहर लाल तेता, उमेन्द केमरो, कोमल हुपेण्डी, पवन मण्डावी, संजय शोरी, हरपाल पोटाई, संतोष उसेण्डी, रीता मण्डावी, घसनिन कोरेटी, शांति पोटाई, अनामिका उसेण्डी, मयंक शोरी, संदीप नेताम, बालकुंवर पोया।

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