छत्तीसगढ़ में मिलेट्स फसलों को बढ़ावा देने पर विशेष पहल - नितिन पोटाई . . .

छत्तीसगढ़ में मिलेट्स फसलों को बढ़ावा देने पर विशेष पहल - नितिन पोटाई . . .

कांकेर/बस्तर मित्र।

मिलेट्स की पौष्टिकता और उसके फायदों को देखते हुए फिर से उसका महत्व लोगों तक पहुंचाने की कोशिश सरकार द्वारा की जा रही है। छत्तीसगढ़ में आदिवासी समुदाय के दैनिक आहार का पांरपरिक रूप से अहम हिस्सा रहा है। आज भी बस्तर में रागी का माड़िया पेज बड़े चाव से पिया जाता है छत्तीसगढ़ के वनांचलों में मिलेट्स की खेती भी भरपूर होती है। मोटे अनाजों के उत्पादन और उपभोग को प्रोत्साहित करने के लिए छ.ग. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल पर मिलेट मिशन चलाया जा रहा है।

राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य और जिला वनोपज सहकारी संघ कांकेर के अध्यक्ष नितिन पोटाई ने बताया कि छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है, जहां मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में मिलेट्स को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में कोदो, कुटकी और रागी का ना सिर्फ समर्थन मूल्य घोषित किया गया, अपितु समर्थन मूल्य पर खरीदी भी की जा रही है। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के माध्यम से प्रदेश में कोदों, कुटकी एवं रागी का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित कर उपार्जन किया जा रहा है।

श्री पोटाई ने बताया कि छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में नथिया नवागांव में मिलेट्स का सबसे बड़ा प्रोसेसिंग प्लांट भी स्थापित किया जा चुका है, जो कि एशिया की सबसे बड़ी मिलेट्स प्रसंस्करण ईकाई है। अब तक राज्य के 10 जिलों में 12 लघु मिलेट प्रसंस्करण केन्द्र स्थापित किए जा चुके है। वन मंत्री मोहम्मद अकबर के कुशल मार्गदर्शन में प्रदेश में अब तक 11 करोड़ 94 लाख रूपय मूल्य की 38 हजार 686 क्विंटल कोदो, कुटकी और रागी की खरीदी हो चुकी है। राज्य लघु वनोपज संघ से प्राप्त जानकारी के अनुसार कोदो की खरीदी 35.78 रूपय प्रति किलो की दर से की जा रही है। अब तक 31 हजार 750 क्विंटल कोदो, 1 हजार 378 क्विंटल कुटकी और 5 हजार 558 क्विंटल रागी की खरीदी की जा चुकी है।

श्री पोटाई ने आगे बताया कि पूरे प्रदेश के ऐसे ग्रामों को जो जिला यूनियन के कार्यक्षेत्र से बाहर स्थित है, ऐसे क्षेत्रों को चिन्हांकित कर समीपस्थ प्राथमिक लघु वनोपज समिति एवं जिला यूनियन के कार्यक्षेत्र में शामिल किया गया है। जिससे ऐसे क्षेत्रों में कोदो, कुटकी और रागी की समर्थन मूल्य पर खरीदी हो सके और इन फसलों का संग्रहण करने वाले संग्राहकों को समर्थन मूल्य का लाभ मिले।

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