नारायणपुर के गढ़बेंगाल में घोटुल संस्कृति दोबारा जीवित, घोटुल स्थल का शुभारंभ---

नारायणपुर के गढ़बेंगाल में घोटुल संस्कृति दोबारा जीवित, घोटुल स्थल का शुभारंभ---

कांकेर

जिले के चेंदरू पार्क में छत्तीसगढ़ सरकार की तरफ से बहुत बड़ी पहल की गई है. यहां पारंपरिक घोटुल स्थल का शुभारंभ किया गया. इस घोटुल से आदिवासी संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन को मजबूती मिलेगी. इस अवसर पर बस्तर सांसद महेश कश्यप और छत्तीसगढ़ के वन मंत्री केदार कश्यप मौजूद रहे. इस अवसर पर गढ़बेंगाल में आदिवासी संस्कृति का संगम देखने को मिला.

आदिवासी नर्तक दलों की सुंदर प्रस्तुति

घोटुल के उद्घाटन के अवसर पर आदिवासी नृतक दलों ने एक से एक बढ़कर सुंदर प्रस्तुति दी. उसके बाद मंत्री केदार कश्यप और सांसद महेश कश्यप ने आग़ा पूजा कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की. उसके बाद मंत्री और सांसद महोदय ने घोटुल परिसर का दौरा किया. इस दौरान मंत्री केदार कश्यप ने बस्तर बीयर के नाम से जाने जाने वाले सल्फी के वृक्ष का रोपण किया है. उन्होंने घोटुल की स्थापना पर खुशी जाहिर की.

कैसे हुआ घोटुल का निर्माण ?

घोटूल का निर्माण जिला प्रशासन और वन विभाग की तरफ से किया गया है. पद्मश्री पांडीराम मंडावी के सहयोग से इसे बनाया गया है. इसे पूरी तरह इको फ्रेंडली सामग्री लकड़ी, मिट्टी और बांस से तैयार किया गया है. खंभों पर की गई बारीक नक्काशी खुद पद्मश्री मंडावी ने की है, जिससे इसकी और भव्यता दिखती है.

घोटुल परिसर की खासियत

घोटुल परिसर में सगा कुर्मा (बैठक कक्ष), उदना कुर्म (विश्राम कक्ष), बिडार कुर्मा (सामग्री कक्ष) और लड़के-लड़कियों के लिए अलग-अलग कक्ष बनाए गए हैं. मुख्य द्वार की सुंदर नक्काशी इस सांस्कृतिक धरोहर को एक अनूठा आकर्षण प्रदान कर रही है.

चेंदुरू पार्क में तैयार हुआ घोटुल सांस्कृतिक प्रतीक है. यह आदिवासी जीवन शैली और परंपरा को जीवंत रखने का माध्यम है. इसके जरिए आदिवासी परंपरा, आदिवासी ज्ञान को जीवंत रखने में मदद मिलेगी. आने वाली पीढ़ियों को घोटुल से आदिवासी संस्कृति की गौरवशाली परंपरा को देखने समझने का मौका मिलेगा.

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लेखक (Reporter)

Birma Mandavi

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