10 करोड़ का इनामी बसवाराजू, एनर्जी कैप्सूल लेता और ब्रांडेड जूते पहनता था, एनकाउंटर के बीच पूरा गांव खाली ...

10 करोड़ का इनामी बसवाराजू, एनर्जी कैप्सूल लेता और ब्रांडेड जूते पहनता था, एनकाउंटर के बीच पूरा गांव खाली ...

कांकेर

छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ के जंगल में 10 करोड़ रुपये का इनामी नक्सली बसवाराजू ढेर हुआ. इस सबसे बड़े नक्सली के एनकाउंटर के बाद NDTV की टीम ग्राउंड जीरो पर पहुंची. घटनास्थल पर कई ऐसी चीजें मिली हैं जिसे जानकर आप भी चौंक जाएंगे. यहां खून के धब्बे और निशान तो मिले ही हैं, इसके साथ ही एनर्जी कैप्सूल और ब्रांडेड जूते भी पड़े मिले हैं. इस बात से अंदाजा लगाया जा रहा है कि नक्सली बसवाराजू एनर्जी के लिए कैप्सूल लेता था और ब्रांडेड जूते भी पहनता था.

किलेकोट पहाड़ के नीचे बसा है गुंडेकोट गांव

नारायणपुर के ओरछा ब्लॉक के गुंडेकोट गांव के पास मुठभेड़ हुई है. गुंडे कोट पहुंचने के लिए ओरछा से जाटलूर, बोटेर गांव होते हुए गुंडेकोट पहुंचते हैं. गुंडेकोट अबूझमाड़ का वह इलाका है जहां सुरक्षा बल के जवानों और माओवादियों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई थी. तीन जिलों नारायणपुर , बीजापुर , दंतेवाड़ा से चारों ओर घने जंगलों से घिरा गुंडेकोट गांव जिला मुख्यालय नारायणपुर से लगभग 120 से 150 किलोमीटर सबसे पहले एनडीटीवी की टीम अबूझमाड़ से बूटेर गांव पहुंची. इसी गांव से होकर गुंडेकोट पहुंचना होता है.

पेड़ों पर गोलियों के निशान

बसव राजू की मौजूदगी की बात ग्रामीण तो कर ही रहे हैं,लेकिन घटना स्थल पर पड़ी सामग्री भी इस बात को प्रमाणित कर रही है कि वहां बसवराजू मौजूद था. यहां एनर्जी के लिए इस्तेमाल होने वाले कैप्सूल पड़े थे. वहां ब्रांडेड जूते भी पड़े थे. गोलियां तो इतनी चली कि घना जंगल भी छलनी हो गया है. जंगल में अनिगिनत पीतल के खोखे पड़े थे.

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ऐसे हुआ था आमना-सामना

पूरे पहाड़ को फोर्स ने घेरा था. नक्सलियों के छिपने की कोई जगह नहीं मिली. गांव के लोग बताते हैं कि ऊपर ड्रोन उड़ता है नीचे माओवादियों का पीछा फोर्स कर रही थी. एक जगह आकर आमना-सामना हुआ तो माओवादियों ने गोली चलाना शुरू कर दिया. माओवादियों की पहली गोली से ही जवान शहीद हुआ था. इसके बाद फोर्स जवाबी कार्रवाई में माओवादी मारे गए. ग्राउंड जीरो की तस्वीरें साफ बता रही है कि इस पहाड़ पर माओवादियों का सुरक्षित ठिकाना.

पुलिस सूत्रों का कहना है जिस स्थान पर बसवा राजू की लोकेशन थी, वहां आज तक कोई ऑपरेशन लॉंच नहीं किया गया है. अधिकारियों को मालूम था वहां से माओवादी बहुत जल्द ठिकाना नहीं बदल पाएंगे. इसलिए तीनों जिलों की फोर्स को एक साथ इस पहाड़ को घेरने की अधिकारियों ने प्लानिंग की. इस प्लांनिंग का बड़ा ही सार्थक परिणाम अधिकारियों के सामने आया है. गांव वालों की बात मानें तो बसवाराजू के साथ 40 लड़ाके भी मौजूद थे. हालांकि इस भीषण मुठभेड़ में बसवाराजू के करीब 10 से 12 साथी किसी तरह भागने में कामयाब हो गए.

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लेखक (Reporter)

Birma Mandavi

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