अबूझमाड़ में विकास की बयार, कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीण, आश्रम शाला शुरू करने की मांग...

अबूझमाड़ में विकास की बयार, कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीण, आश्रम शाला शुरू करने की मांग...

कांकेर

छत्तीसगढ़ में नारायणपुर जिले के घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र अबूझमाड़ में बदलाव की बयार चल रही है. गुमारका गांव के ग्रामीणों ने जिला मुख्यालय पहुंचकर बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर कलेक्टर से मुलाकात की.

बच्चों के लिए आश्रम शुरू करने की मांग

ग्रामीणों ने बताया कि वर्षों पूर्व गांव में एक आश्रम शाला संचालित होती थी, जो बच्चों के लिए शिक्षा का एकमात्र साधन थी. लेकिन बिना किसी ठोस कारण के इस आश्रम शाला को बंद कर दिया गया और उसे कहीं और स्थानांतरित कर दिया गया. अब बच्चों को पढ़ाई के लिए ओरछा या जिला मुख्यालय तक जाना पड़ता है, जो कई किलोमीटर दूर है. इस कारण कई बच्चे पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हैं.

बस्तर के बच्चों को चाहिए स्कूल

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि गांव में सड़क नहीं होने से आवागमन बेहद कठिन है. विभागीय योजनाएं गांव तक नहीं पहुंच पातीं और बीमार लोगों को कंधे पर कावड़ में लादकर कई किलोमीटर दूर कुतुल ले जाना पड़ता है. गांव में पीने के पानी, बिजली और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है. ग्रामीणों ने बताया कि कलेक्टर ने उन्हें आश्वस्त किया है कि उनकी मागों पर पूरा ध्यान दिया जाएगा और जल्द उनकी समस्या का निदान होगा.

कलेक्टर ने किया मदद का वादा

छत्तीसगढ़ सरकार की नियद नेल्लानार योजना के तहत अबूझमाड़ क्षेत्र में पुलिस कैंप की स्थापना और उसके आसपास के 5 किलोमीटर के दायरे में बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने का काम तेजी से किया जा रहा है. इन प्रयासों का असर अब दूरस्थ क्षेत्रों में भी दिखाई देने लगा है. ग्राम गुमारका के ग्रामीणों की यह पहल अबूझमाड़ क्षेत्र में बदलाव की बयार का संकेत है. जहां एक समय तक विकास कार्यों का विरोध होता था, वहीं अब ग्रामीण स्वयं आगे बढ़कर शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत ढांचे की मांग कर रहे हैं. ग्रामीणों की मांगों को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगई ने जल्द समाधान का आश्वासन दिया है.

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लेखक (Reporter)

Birma Mandavi

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