कांकेर/बस्तर मित्र
न्यायधानी के जिला अस्पताल में मानवता को शर्मसार करने वाला एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां बिल्हा के सरवानी गांव से आई एक प्रसूता और उसके नवजात शिशु की जान दांव पर लगी हुई थी। ऐसी नाजुक स्थिति में भी ड्यूटी पर तैनात नर्स ने डॉक्टर न होने का बहाना बनाया और मरीज को निजी अस्पताल ले जाने की सलाह दे डाली।
जिला अस्पताल में ममता कैंवट के प्रसव को लेकर नया मोड़ आया है। अब अस्पताल प्रबंधन द्वारा पूरे मामले पर पर्दा डालने का प्रयास शुरू हो गया है। प्रबंधन नर्स को बचाने के लिए वीडियो बनाने वाले पर शराब पीकर मामले को गलत ढंग से प्रस्तुत करने का आरोप लगा रहे है। वीडियों में दिख रहा है कि एक तरफ नवजात की जान दांव पर लगी थी। वहीं दूसरी तरफ स्वास्थ्य अमला अपनी कमियां छुपाने निजी हास्पिटल भेजने में लगा था। अब कलेक्टर ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।
बिल्हा सरवानी से जिला अस्पताल पहुंची प्रसूता ममता कैंवट और उसके अजन्मे बच्चे की सांसें जब दांव पर लगी थीं, तब अस्पताल प्रबंधन संवेदनहीनता की नई कहानी लिख रहा था। ममता जब अस्पताल पहुंची तो बच्चे का पैर बाहर आ चुका था। ऐसी नाजुक घड़ी में भी तीमारदारों को ढाढ़स बंधाने के बजाय कथित तौर पर निजी अस्पताल ले जाने की सलाह दे दी गई। इस गंभीर और मार्मिक रवैए पर जब सवाल उठे, तो अब स्वास्थ्य महकमे के बयानों और परिजनों के बयानो में भारी विरोधाभास सामने आने लगा है।
0 Comments